आईपीएल क्रिकेट सट्टा और सूदखोरों के कर्ज से परेशान रेलवे में रहे लोको पायलेट ने की आत्महत्या सूदखोरों की प्रताडना बना आत्महत्या का कारण परिजनों ने नामजद लगाए आरोप
आईपीएल क्रिकेट सट्टा और सूदखोरों के कर्ज से परेशान रेलवे में रहे लोको पायलेट ने की आत्महत्या सूदखोरों की प्रताडना बना आत्महत्या का कारण परिजनों ने नामजद लगाए आरोप
कटनी।। NKJ थाना क्षेत्र के रोशन नगर में सोमवार को एक 36 वर्षीय युवक ने आत्महत्या कर ली। घटना स्थल पर पहुंची पुलिस को युवक के पास एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें लिखा कि उसकी मौत के जिम्मेदार अमित नायक, नवीन गर्ग, शिवांस जायसवाल, अभिषेक गौतम, रुपेश, राकेश तिवारी और पासू अन्ना है। कर्जदार परेशान कर रहे हैं जिस वजह से यह कदम उठा रहा हूं। सुसाइड नोट में 7 लोगों के नाम भी खिले है। मरने से पहले युवक ने एक पन्ने का सुसाइड नोट लिखा। जिसमें परेशानी का जिक्र किया है। पुलिस सुसाइड नोट की जांच कर रही है। जिले में आईपीएल क्रिकेट सट्टा और सूदखोर किसी गैंग की तरह काम कर रहे हैं, जो समय पर रुपए नहीं लौटाने वाले को धमकी देने से लेकर मारपीट तक करते हैं। इसकी बात का अंदाजा रेलवे में असिस्टेंट लोको पायलट के पद पर पदस्थ एक युवक के द्वारा फांसी के फंदे पर लटकने के बाद उसकी जेब से मिले सोसाइट नोट पर लिखें नामो से लगाया जा सकता है।
NKJ थाना क्षेत्र के रोशन नगर निवासी रेलवे में असिस्टेंट लोको पायलट के पद पर पदस्थ एक युवक ने सोमवार शाम अपने घर में फांसी लगा ली। जिसकी जानकारी पुलिस और परिजनों कों दी गई। पुलिस ने करावाई करतें हुए शव कों परीक्षण के लिए शासकीय जिला चिकित्सालय भेजा जहाँ पर परीक्षणउपरांत शव कों कफ़न दफन के लिए परिजनों के सुपुर्द किया गया। इस सबंध में मृतक के छोटे भाई सुमित बर्मन ने बताया कि रोशन नगर निवासी अमित पिता नारायण प्रसाद बर्मन (36) वर्ष उसका बड़ा भाई था और रेलवे में अस्सिटेंट लोको पायलट के पद पर पदस्थ था। सोमवार को दोपहर में जब वह घर गया तो उसका बड़ा भाई अमित बर्मन फांसी के फंदे पर लटका मिला। फंदे से उतारकर उसे जिला अस्पताल लाया गया। जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। सुमित बर्मन ने बताया कि उसके बड़े भाई के जेब से एक सुसाइड नोट मिला है। जिसमें लिखा है उसकी मौत के जिम्मेदार अमित नायक, नवीन गर्ग, शिवांस जायसवाल, अभिषेक गौतम, रुपेश, राकेश तिवारी और पासू अन्ना है। सुसाइड नोट में 15 से 20 प्रतिशत ब्याज में रुपए उधार लेने और उन्हीं रुपयों को वापस लेने और मानसिक रूप से परेशान करने का आरोप लगाया गया है। साथ ही रुपेश पर बाइक छीनने का आरोप भी लगाया गया है।
मृतक के परिजनों ने बताया कि दरअसल अमित पिता नारायण प्रसाद बर्मन (36) वर्ष रेलवे में लोको पायलेट के पद काम करता था। मृतक के परिजनों ने बताया कि अमित कुछ दिनों से क्रिकेट में सट्टा लगाने और हार जाने के चलते काफी कर्ज में डूब गया। जिसके बाद सूदखोरों से भी काफी कर्ज लिया। सूदखोरों लगातार पैसा वसूली के दवाब बनाने लगे। जिससे छुटकारा पाने के लिए उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। फिलहाल युवक की आत्महत्या के पीछे कौन से वो सूदखोर हैं।
जिनकी प्रताड़ना और धमकी से तंग आकर महेंद्र ने आत्महत्या की है। इस बात का खुलासा जांच के बाद होगा,असिस्टेंट लोको पायलट अमित के पेंट से एक सुसाइड नोट भी मिला है। जिसमें सात युवकों पर उधार के रुपए को लेकर मानसिक रूप से परेशान करने का आरोप है। साथ ही अपनी मौत का जिम्मेदार भी उन्हीं को बताया है। लेकिन जिस तरीके से बाहुबली सूदखोरों का नेटर्वक दिनों-दिन बड़ा होता जा रहा है। जिसमें युवा पीढ़ी फंसती चली जा रही है। उधर सूदखोरों के फंदे पर पुलिस प्रशासन नकेल कसने में नाकाम साबित हो रहा है।
इस मामले में एनकेजे थाना प्रभारी नीरज दुबे ने बताया कि युवक की मौत के मामले में मर्ग कायम कर जांच की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य और साक्ष्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
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*उठो..लाल.. आब..आँखे..खोलो..अगर सरकारी विभागों के खिलाफ खबर हजम नही हो तो मीडिया को खण्डन छापने का बोलो।* *रतलाम ब्यूरो रिपोर्ट इमरान खान* रतलाम समाज की आँखे माने जाने वाला मीडिया अब जिम्मेदारों की आँखों की किरकिरी बनते जा रहे है। घोटाले, घपले, लापरवाहियां, खामियां,लेटलतीफी,मनमानी, रिश्वतखौरी आदि हर तरफ पसरी हुई है, मगर जिम्मेदार इन सभी बुराईयों को मौन स्वीकृति देकर या इन्हे अनदेखा कर इनके कारनामों की परते खोलने वालों पर लगाम कसने की तैयारी कर रहे है। बीते दिनों एक फतवा जारी हुआ है, जिसमें उल्लेख किया गया है कि प्रत्येक विभाग प्रमुख हर दिन सुबह अखबार पढ़ेगा, पोर्टल आदि खोलेगा और अपने या अपने विभाग से संबधित खबर को पढ़ेगा,देखेगा । अगर खबर सही है तो खबर में बताई गई बुराईयों को दूर करने का त्वरित प्रयास करेगा और अगर खबर विभाग प्रमुख को हजम नही होती है, तो इनकी जिम्मेदारी रहेगी कि वह खबर का खण्डन हर हाल में मीडिया वाले के माध्यम से उसी दिन कराए। अरे….खंडनबाजों…. अगर विभाग प्रमुख और अमला….इतना सजग और सेवाभावी होता तो जनसुनवाई जैसे कार्यक्रमों में 100-100 शिकायती आवेदन हर मंगलवार को नही पहुचते। जनता अपनी परेशानियों से लोहा लेते लेते आंदोलन और चक्काजाम आदि करने को मजबूर नही होती। लोग सूचना का अधिकार की तहत जानकारी लेने के लिए सालों से भटक रहे है और जिला पंचायत जैसे विभाग के अफसर उन्हे कार्यालय बुलाकर निपटाने की तैयारियों को अंजाम देने में लगे है। खंडन परम्परा को हवा देकर इसे स्थापित करने के अखबारों को अधकचरे और समय बैसमय समाचार देने वाले एक विभाग को भी पांबद किया गया है। इस विभाग के जिम्मेदार भी अखबार की कतरन संबधित विभाग के प्रमुख को भेज कर समाचारों में खंडन की संभावना खोजने का प्रयास करेगे। इधर मीडिया भी इतना फ्री नही बैठा है कि कुछ भी छापता छूपता रहे। अखबारों का तो 1 कालम 10 सेंटीमीटर हिस्सा ही लगभग 1 से 3 हजार तक बैठ रहा है। इस हिसाब से अगर सरकारी समाचार को छापकर विभागों को भुगतान के बिल भेजे जाएंगे? तो खर्च का हिसाब हर माह लाखों में बैठेगा। अब इधर अगर कोई जनता की आवाज, परेशानी, उसका शिकायती पत्र आदि मीडिया के माध्यम से उजागर करता है तो उसमें सुधार के प्रयास किए जाना चाहिए। इस तरह के फरमान से उन विभाग वालों की बल्ले बल्ले हो गई है, जो नामचीन और आदतन लापरवाह भ्रष्ट आचरण आदि की लिस्ट में शामिल है। राजस्व, नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, लोक निर्माण, जल निगम, सडक़ परिवहन आदि विभागों के कारनामों और कार्यप्रणाली को को बीते दिनों दिशा समिति की बैठक में सांसद,विधायकों सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने उजागर बता दिया है कि जिले का विकास किस… अगति की और अग्रसर होता जा रहा है। कई विभागों की फाईले विगत माह से इधर से उधर गोते खा रही है, पहले नीचे वाले अफसर से अवलोकन कराओं और उसके बाद बड़े साहब की स्वीकृति लेने आओं। बहरहाल, अब समय आ गया है कि फरमान जारी करने वालों के दरबार में भांड मिरासियों की तरह इनका गुणगान करो। अगर इनके गायन के अनुसार सुर नही लगाया तो फजीहत हो सकती है। फिलहाल इस फरमान का पालन कौन-कौन, कब-कब करता है, ये आने वाले समय में पता चलेगा, फिलहाल… विभाग प्रमुख अपने विभागों की खबरे पढक़र खंडन-फंडन तैयार करने की तैयारियों का मसौदा तैयार कर रहे है या करवा रहे है।
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